#3

किन लम्हों को भूलूं किन्हे याद रखूं ये सोचता हूं अक्सर,

गर कुछ लम्हों ने सब कुछ दिया तो कुछ ने सब ले भी लिया…..

#2

“उम्मीदें इंसानों से नहीं सिर्फ़ तुझसे है…
ऐ ख़ुदा
जो रास्ता आता हो तेरी तरफ़ मुझे बस वहीं चला…
भीड़ से हो जाऊं अलग इसका कोई गम नहीं…
बस डर है इतना कि न हो जाऊं कहीं तुझसे जुदा…”

#1

उड़ते परिंदों के आशियाँ हवा में नहीं होते
समझिये,
वक्त वक्त की बात है कि जुबाँ पर जज्बात नहीं होते।

ज़िन्दगी

बारिश में रख दो इस जिंदगी के पन्नों को,
कि धुल जाए स्याही,
ज़िन्दगी तुझे फिर से लिखने का
मन करता है कभी- कभी।।

यादों में कैद मुलज़िम

किसी औऱ की यादों में कैद,
‘मुलज़िम’
आसानी से रिहा नहीं हुआ करते…
बदलते हैं ‘लम्हे’
बेबसी लिये,
खुशियों के दामन को ये छूआ नहीं करते…
तड़पती है ‘रूह’
और भरती हैं आहें रह रह के
कि चलने को आगे अब कदम बढ़ा नहीं करते…

समझदार हूँ मैं

ज़ुबाँ पर माफ़ी

आंखों में उम्मीद

खुशी का कर्ज़दार हूँ मैं

शायद

हद से ज्यादा समझदार हूँ मैं

कहने को दिल बेकरार

जुबां पर खामोशी अख्तियार

ज़हन में पल पल उठता दबता तूफान हूँ मैं

शायद

हद से ज्यादा समझदार हूँ मैं

अब मैं

बड़ी मासूम सी हक़ीकत थी

और बेढंग सा फ़साना था

मैं कैदी अपने ऐब का था

और वक़्त को भी कहीं तेज़ जाना था

अब

निकल चुका वो वक़्त है

ऐब का खिसक रहा तख़्त है

फ़साना अब ज़ब्त है

हक़ीक़त बहुत सख्त है

रही बात मेरी

बदल रहा धीमे से मैं और तेज़ मेरा वक़्त है